Basant panchmi kyon Manaya jata hai | जानिए, 2023 में बसंत पंचमी कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त

नमस्कार दोस्तों, अगर आप यह जानना चाहते हैं कि Basant panchmi Kyon Manaya jata hai  तो इसका जवाब बिल्कुल आसान है, ऐसी मान्‍यता है कि बसंत पंचमी के दिन ही विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्‍म हुआ था | बसंत पंचमी वाले दिन अधिकतर स्कूलों में विद्या की देवी मां सरस्‍वती की जयंती के रूप में मनाया जाता है |      

हमारा देश भारत एक धार्मिक देश हैं यहां पर अनेकों धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं | लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि अलग-अलग धर्मों से जुड़े होने के बावजूद भी पूरा देश इन त्योहारों को एक साथ मिलकर मनाता हैं | विदेशी लोग भी हमारी संस्कृति और त्योहारों को देखकर काफी प्रभावित हैं | 

बसंत पंचमी भी भारत के प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है | बसंत पंचमी के बारे में आपने अवश्य  सुना होगा लेकिन केवल कुछ लोग ही यह जानते होंगे की Basant panchmi Kyon Manaya jata hai अगर आप भी बसन्त पंचमी से संबंधित विस्तार से जानना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए ही है |              

खासकर बसंत पंचमी हिंदुओं त्यौहार हैं | वैसे तो बसंत पंचमी भारत के बाहर भी कई देश जैसे की नेपाल, भूटान, पाकिस्तान और बंगलादेश में भी मनाया जाता हैं लेकिन सबसे अधिक उत्साह भारत में ही रहता हैं | इसी दिन से होलिका के लिए तैयारियां भी शुरू की जाती हैं |    

कहते हैं की सरस्वती पूजा विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है | क्योंकि मां सरस्वती ज्ञान और विद्या के दाता हैं | सरस्वती पूजा के बाद से वातावरण भी पढ़ाई के अनुकूल रहता है क्योंकि न तो ज्यादा सर्दी होती हैं न ही ज्यादा गर्मी होती हैं | तो आइए दोस्तो Basant panchmi Kyon Manaya jata hai विस्तार से जानते हैं |                      

बसंत पंचमी का त्यौहार कैसे मनाया जाता है (How is the festival of Basant Panchami celebrated)

बसंत ऋतु की शुरुआत इसी दिन से शुरू हो जाती है वैसे तो कुल मिलाकर हमारे देश में छह ऋतुएं होती हैं लेकिन बसंत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है | पेड़ पौधों में नए फूल आने लगते हैं  जिससे मौसम और सुहाना हो जाता है | विशेषकर यह त्‍योहार उत्तर भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है | कई जगहों पर आज के दिन पर पतंगबाज़ी भी की जाती है | 

Basant panchmi Kyon Manaya jata hai – खासकर किसानों के लिए इस त्‍योहार का विशेष महत्‍व होता है | बसंत पंचमी पर सरसों के खेत लहलहा उठते हैं | चना, जौ, ज्‍वार और गेहूं की बालियां खिलने लगती हैं | मान्यता यह है कि आज के के दिन विद्या और ज्ञान की देवी सरस्‍वती का जन्‍म हुआ था इसलिए इस दिन मां सरस्‍वती का पूजन किया जाता है |                      

बसंत पंचमी  वाले दिन अधिकतर लोग पीले वस्त्र पहनकर और पीले रंग के फूलों से मां सरस्वती की पूजन करते हैं | खासकर स्कूलों में भी सरस्वती पूजा की जाती है | देखा जाए तो बसंत पंचमी से ठंढ कम होना शुरू हो जाता है और धीरे-धीरे गर्मी के आगमन की शुरुआत हो जाती है | 

सरस्वती पूजा वाले तिथि को शादी-विवाह, गृह प्रवेश आदि कार्यों के लिए शुभ माना जाता है | माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से विद्यार्थियों को बुद्धि और विद्या का वरदान प्राप्त होता है |  इस दिन मां सरस्‍वती की पूजा कर उन्‍हें फूल अर्पित किए जाते हैं। 

इस दिन संगीत के यंत्रों और किताबों की पूजा की जाती है और पहली बार छोटे-छोटे बच्‍चों को अक्षर ज्ञान कराया जाता है तथा उन्‍हें काफी किताब भी भेंट की जाती है | पीले रंग का वस्त्र पहनना इस दिन शुभ माना गया है अधिकतर राज्यों में इस दिन पीले रंग की खिचड़ी खाई जाती है |  

बसंत पंचमी का आध्यात्मिक महत्व (Spiritual Significance of Basant Panchami)

ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना के समय महसूस किया कि जीवों की सर्जन के बाद भी चारों ओर मौन छाया रहता है | ब्रह्माजी ने विष्णुजी से अनुमति लेकर अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे पृथ्वी पर एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई | छह भुजाओं वाली इस शक्ति रूप स्त्री के एक हाथ में पुस्तक, दूसरे में पुष्प, तीसरे और चौथे हाथ में कमंडल और बाकी के दो हाथों में वीणा और माला थी |

ब्रह्माजी ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया | जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, चारों ओर ज्ञान और उत्सव का वातावरण फैल गया, वेदमंत्र गूंज उठे | ऋषियों की अंतःचेतना उन स्वरों को सुनकर झूम उठी | ज्ञान की जो लहरियां व्याप्त हुईं, उन्हें ऋषिचेतना ने संचित कर लिया | इसी दिन को बंसत पंचमी के रूप में मनाया जाता है | 

पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी | और तभी से इस वरदान के फलस्वरूप भारत देश में  बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है |

बसंत पंचमी वाले दिन किस कवि का जन्मदिन मनाया जाता है (Which poet’s birthday is celebrated on Basant Panchami)       

भारत देश हमेशा महान प्रतिभाओं की जननी रही है, ऐसे ही एक अद्भुत प्रतिभा का जन्म पंडित रामसहाय त्रिपाठी के घर महिषादल के मेदिनीपुर (बंगाल) में रविवार वाले दिन हुआ था  | जिस कारण से उनका नाम सूर्यकुमार रखा गया |  वाग्देवी के आशीष से सूर्य कुमार ही हिंदी साहित्य के दैदीप्यमान नक्षत्र ‘सूर्यकांत त्रिपाठी निराला’ कहलाए | 

कुछ लोग इनकी जन्म तिथि 21 फरवरी, 1896 मानते हैं और कुछ 1891 जो भी हो, साहित्य जगत को निराला के रूप में एक ऐसा कवि मिला जिसने छायावादी कवि होते हुए भी यथार्थ की भूमि को पल-भर के लिए भी नहीं छोड़ा | वे अन्य छायावादी कवियों से सर्वथा भिन्न रहे | उनकी कल्पना ने यथार्थ की धरा को थामे रखा | 

किसी ने उन्हें छायावादी युग का ‘कबीर’ कहा तो किसी ने सांस्कृतिक चेतना का ‘वैतालिक’ | किसी ने ‘मतवाला’ कहा तो किसी ने विद्रोही कवि की संज्ञा दी | किंतु इन सारे वैविध्यों के बीच भी उनका जीवन और काव्य ‘निराला’ ही बना रहा | वे एक साथ दार्शनिक भी थे, समाज-सुधारक भी, स्वाभिमानी भी थे, अक्खड़ भी, फक्कड़ भी, उदारचेता भी, पर इन सबसे ऊपर बढ़कर ‘महामानव’ थे | इसी दिन “सूर्यकांत त्रिपाठी निराला” का जन्मदिन मनाया जाता है |

2023 में  बसंत पंचमी कब है (When is Basant Panchami in 2023)          

भारतीय हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष बसंत पंचमी 26 जनवरी 2023 को मनाई जाएगी | बसंत पंचमी को श्रीपंचमी भी कहते हैं, दरअसल माघ शुक्‍ल पंचमी 25 जनवरी की शाम से ही शुरू हो जाएगी लेकिन उदयातिथि के अनुसार बसंत पंचमी सभी राज्यों में 26 जनवरी को मनाई जाएगी | 

यानी कि साल 2023 में गणतंत्र दिवस और बसंत पंचमी एक ही मनाई जाएगी | धार्मिक दृष्टि से ये पर्व विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है | वहीं गणतंत्र दिवस का आयोजन भी सभी शिक्षण संस्‍थानों में बड़े पैमाने पर किया जाता है | 26 जनवरी का दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत ही खास खास होने जा रहा है |

बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त (Auspicious time of Basant Panchami Puja) 

पंचांग के अनुसार साल 2023 में बसंत पंचमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी 2023 की दोपहर 12:34 बजे से होगी और 26 जनवरी, 2023 को सुबह 10:28 बजे समाप्‍त होगी | इस तरह बसंत पंचमी की पूजा करने के लिए सबसे शुभ मुहूर्त 26 जनवरी 2023 की सुबह 10:28 बजे तक रहेगा | 

बसंत पंचमी का वैज्ञानिक महत्व (Scientific significance of Basant Panchami)             

वैज्ञानिक सिद्धांत ऊर्जा पर आधारित हैं | पीला रंग सूर्य के प्रकाश का है यानी यह ऊष्मा शक्ति का प्रतीक है | पीला रंग हमें तारतम्यता, संतुलन, पूर्णता और एकाग्रता प्रदान करता है | मान्यता है कि यह रंग डिप्रेशन दूर करने में कारगर है | 

यह उत्साह बढ़ाता है और दिमाग सक्रिय करता है | नतीजतन दिमाग में उठने वाली तरंगें खुशी का अहसास कराती हैं | यह आत्मविश्वास में भी वृद्धि करता है | हम पीले परिधान पहनते हैं तो सूर्य की किरणें प्रत्यक्ष रूप स दिमाग पर असर डालती हैं |  

साथियों,उपरोक्त आर्टिकल के माध्यम से हमने आपको Basant panchmi Kyon Manaya jata hai की सही जानकारी देने की कोशिश की है अगर आपको यह लेख अच्छा लगे तो अपने दोस्तों, रिश्तेदारों के साथ शेयर अवश्य करें |  

धन्यवाद !   

FAQ: 

Q:बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा क्यों कहा जाता है ?

Ans: क्योंकि इस मौसम में न तोअधिक सर्दी पड़ती है और न  ही अधिक गर्मी | English महीने के अनुसार ये मार्च-अप्रैल में होती है | इसमें  बसंत पंचमी, नानक त्योहार आता है, पीली-सरसों खिलती है, पेड़ों पर नए पत्ते, नई कोपल आती है, आम के बौर भी लगते हैं |      

Q: माँ सरस्वती के वस्त्र कैसे है ?

Ans: मां सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं अत: उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं | सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं | प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदी अर्पित करना चाहिए | इस दिन सरस्वती माता को मालपुए एवं खीर का भी भोग लगाया जाता है |     

Q: सरस्वती किसकी बेटी है ?

Ans: ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद सरस्वती जी को अपने तेज से उत्पन्न किया था | इसीलिए यह कहा जाता है कि सरस्वती जी की कोई मां नहीं थी | सरस्वती जी को विद्या की देवी कहा जाता है |