HDFC Bank की ताजा खबरें | HDFC को नया घर मिलेगा, लेकिन इससे आपको क्या फायदा होगा ? Zeebiz.in 

होम लोन देने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में एक HDFC LTD. का HDFC Bank में विलय होने जा रहा है | जो भी लोग इन दोनों के ग्राहक हैं,उनके मन में यह सवाल होगा कि इससे उन्हें क्या फायदा या नुकसान होगा | दोनों को एक होने पर मौजूदा ग्राहकों को अपनी राय बनाने से पहले थोड़ा इंतजार करना होगा | विलय की प्रक्रिया 12 – 18 महीने में पूरी होगी | इसके बाद नई यूनिट को HDFC Bank के तौर पर ही जाना जाएगा | समझा जा रहा है कि विलय के बाद होम लोन के मामले में ग्राहकों को लाभ हो सकता है | 

क्या ब्याज दरों में बदलाव होगा ? 

HDFC यूं तो हाउसिंग फाइनेंस कंपनी है और होम लोन देती है, लेकिन इसमें पैसे जमा भी किए जाते रहे हैं | जिन लोगों ने पैसे जमा करा रखे हैं, उनकी ब्याज दरों में विलय के कारण बदलाव नहीं होगा | वजह यह है कि जब कोई व्यक्ति फिक्स डिपाजिट करता है तो वह एक कॉन्ट्रैक्ट होता है | जब तक कॉन्ट्रैक्ट लागू है, नियमों में बदलाव नहीं हो सकता है | एक बार पुराना फिक्स डिपाजिट मैच्योर हो जाए और विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाए तो HDFC Bank में जो भी नई ब्याज दर लागू होगी, वह हासिल हो सकेगी | इसकी संभावना ज्यादा है कि एचडीएफसी बैंक की दरें एचडीएफसी लिमिटेड से कम होंगी | क्योंकि एचडीएफसी लिमिटेड नॉन बैंकिंग फाइनेंस एल कंपनी है, जहां आमतौर पर बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज दरों की पेशकश की जाती है | मौजूदा समय में एचडीएफसी लिमिटेड की ब्याज दर एचडीएफसी बैंक से ज्यादा है | 

शेयर और म्यूचुअल फंडों पर क्या असर होगा ? 

जो लोग शेयर होल्डर हैं, उन्हें विलय के तहत एचडीएफसी के हर 25 शेयर के बदले एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर मिलेंगे | समझा जा रहा है कि बैंकिंग और हाउसिंग फाइनेंस घटकों के बीच विलय के बाद तालमेल बेहतर होगा तो बिजनेस बढ़ेगा | आगे चलकर HDFC Bank कैसा रिटर्न देगा, यह उसके अपने फंडामेंटल और बाजार के हालात पर निर्भर करेगा | 

 अगर म्यूच्यूअल फंड की बात करें तो कई फंड स्कीमों के लिए यह दोनों कंपनियां पसंदीदा स्टॉक हैं | इनके विलय के फैसले से इन फंडों पर भी फर्क पड़ेगा | फंड अपने पोर्टफोलियो में किसी एक स्टाफ को 10% से ज्यादा नहीं रख सकते | रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 फंड ऐसे हैं, जिनमें दोनों के स्टॉक का हिस्सा 10% से ज्यादा है | उन्हें हिस्सा कम करना पड़ेगा | आपके फंड पर इसका फर्क पड़ सकता है | 

होम लोन की दरों में होगी गिरावट ? 

हाउसिंग लोन की ब्याज दर में विलय के बाद मामूली गिरावट हो सकती है | HDFC Bank के रूप में कम दरों पर होम लोन लेने की स्थिति में होगा | बैंकों को बचत खातों और चालू खातों के जरिए कम खर्च में फंड उपलब्ध हो जाता है | लेकिन उन्हें सीआरआर और एसएलआर की जरूरतों को भी पूरा करना पड़ता है | आपको बता दें कि सीआरआर क्या है, आप बैंक में जो पैसा जमा करते हैं, बैंक को उसका एक खास हिस्सा रिजर्व बैंक में रखना होता है | एसएलआर के जरिए जमा रकम का खास हिस्सा लोन जारी करने के पहले बैंक को अपने पास रख लेना होता है | इन दोनों जरूरतों के कारण बैंकों के लिए एनबीएफसी से सस्ता लोन देने की गुंजाइश कम हो जाती है | वैसे भी एचडीएफसी के होम लोन की दरें पहले से ही बेहद कम हैं, इसलिए इसमें कमी की संभावना कम है |असल में बैंक फ्लोटिंग ब्याज दर पर होम लोन देते हैं, यानी इसमें बदलाव होता रहता है | यह बदलाव रेपो रेट जैसे बाहरी बेंच मार्क से जुड़े होने के कारण होता है | रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर आम बैंक रिजर्व बैंक से उधार लेते हैं | यह रिजर्व बैंक की ओर से तय किया जाता है, इसलिए उसमें जब भी कमी होगी, लोन की ब्याज दर भी कम होंगी |