Benefit of animal insurance |  बेनिफिट ऑफ एनिमल इंश्योरेंस | एनिमल इंश्योरेंस कैसे होता है, कराएं पशुओं का बीमा | किसानों का नहीं होगा नुकसान,जानिए क्या है तरीका

साथियों आज हम इस लेख के माध्यम से पशुओं का बीमा कैसे होता है इसके संबंध में जानकारी देने जा रहे हैं आप इस आर्टिकल को अंत तक पढ़ें | गांव में रहने वाले कुछ किसान भाई अपने पशुओं का बीमा नहीं करवाते हैं क्योंकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती है | तो आइए आपको benefit of animal insurance के संबंध में जानकारी देते हैं :-

एनिमल इंश्योरेंस कैसे होता है

सबसे पहले पशुपालकों को अपने पशुओं का बीमा कराने के लिए संबंधित पशु चिकित्सालय में बीमा करवाने के लिए सूचित करना होगा | सूचना देने के बाद पशु चिकित्सक एवं संबंधित कंपनी एजेंट पशुपालक के घर पहुंचेंगे | फिर पशु चिकित्सक द्वारा पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी करेंगे | बीमा के लिए पशु पालक के पास भामाशाह कार्ड एवं बैंक में खाता होना जरूरी है | पशुओं का बीमा करने के दौरान बीमा कंपनी द्वारा पशु के कान में टैग लगाए लगाए जाएंगे | पशु पालक की पशु के साथ संयुक्त फोटो ली जाएगी | पशुओं का बीमा होने के बाद कान में लगाया जाने वाला टैग अगर गिर जाता है तो बीमा कंपनी को सूचित करना होगा | ताकि बीमा कंपनी पशु को नया टैग लगा सके | जिस पशु पालक का भामाशाह कार्ड बना हुआ है, वह अपने पांच पशुओं का बीमा करवा सकते हैं | 

पशु बीमा योजना में गरीब किसानों को 70 प्रतिशत राहत

पशुपालन विभाग द्वारा बीमा की प्रीमियम राशि पर पशुपालकों को अनुदान दिया जाता है | एससी, एसटी, बीपीएल वर्ग के पशुपालकों को भैंस का बीमा 413 रुपये प्रीमियम जिसमें 50 हजार का बीमा है | गाय का 330 की प्रीमियम राशि पर 40 हजार का बीमा है इसमें 70% छूट शामिल है | सामान्य वर्ग के पशुपालकों को बीमा की  प्रीमियम राशि में 50 प्रतिशत छूट है | इन पशुपालकों को गाय के बीमा के लिए 550 भैंस के बीमा के लिए 688 रुपए जमा कराने होंगे | योजना के तहत देसी, संकर नस्ल के दूध देने वाले पशु गाय, भैंस, वजन ढोने वाले ऊंट, घोड़ा, गधा, सांड, पाड़ा तथा अन्य पशु बकरी, भेड़ का बीमा करवाने का विभाग द्वारा एससी, एसटी एवं बीपीएल पशुपालकों को 80 प्रतिशत अनुदान एवं सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 70 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है | benefit of animal insurance के तहत किसी बीमारी या दुर्घटना से बीमाकृत पशु की मृत्यु होने पर 100 प्रतिशत बीमा लाभ दिया जाता है | अनुदानित बीमा के लिए दुधारू गाय की कीमत 40 हजार, भैंस की 50 हजार, वजन ढोने वाले पशु ऊंट, घोड़ा, गधा, पाड़ा की अधिकतम 50 हजार रुपये रहेगी | बीमा योजना में टैग से पशुओं की पहचान सुनिश्चित होने से इसमें पारदर्शिता रहती है | 

पशुधन बीमा योजना और इसके लाभ 

पशुपालकों और किसानों के लिए पशु एक कमाई का महत्वपूर्ण जरिया होता है | बीमारी, मौसम या दुर्घटना से होने वाली पशु की मौत से पशु पालकों और किसानों को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए केंद्र सरकार ने यह (पशुधन बीमा योजना) benefit of animal insurance सन 2006 में लागू की थी | इसकी शुरुआत दसवीं पंचवर्षीय  2005 – 6 वर्ष में की गई थी | उसके बाद 2006 – 7, 2007 – 8 वर्षों में भी थे चलाया गया | इन दो पंचवर्षीय (दसवीं पंचवर्षीय और ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना) में देश के 100 जिले को चयनित किया गया था | जो अब बढ़कर इस योजना को 300 जिलों में नियमित रूप से चलाई जा रही है | 

benefit of animal insurance के दो उद्देश्य हैं 

पहला किसानों तथा पशु पालकों को पशुओं की मृत्यु के कारण हुए नुकसान से सुरक्षा मुहैया करवाना, तथा दूसरा उद्देश्य पशुधन बीमा के लाभों को लोगों को बताना और इसे पशुधन तथा उनके उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण विकास के चरम लक्ष्य के साथ लोकप्रिय बनाना | 

योजना के अनुसार वर्तमान मूल्य पर देसी / संकर दुधारू मवेशियों और भैंसों का बीमा किया जाता है | बीमा का प्रीमियम 50 प्रतिशत तक हिस्सा सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दिया जाता है | इस अनुदान का लाभ अधिकतम दो पशु प्रति लाभार्थी को अधिकतम 3 साल के लिए एक पॉलिसी पर मिलता है | यह योजना लगभग सभी राज्यों में संबंधित राज्य पशुधन विकास बोर्ड द्वारा चलाई जा रही है | 

Insured animal identification method बीमा कृत पशुओं की पहचान विधि 

बीमा किए गए पशुओं की बीमा राशि के दावा निपटारे के समय उसकी सही पहचान के लिए पशु के कान में अंकन किया जाता है | जिससे पशु की पहचान संभव हो सके | अब माइक्रोचिप की तकनीकी आ गई है जिससे पशु की पहचान के साथ उसकी लोकेशन भी निर्धारित किया जा सकता है | पहचान चिन्ह लगाने का खर्च बीमा कंपनी द्वारा किया जाता है | और इसके रखरखाव की जिम्मेदारी पशु पालकों की होती है | 

Animal insurance procedure पशु बीमा की प्रक्रिया 

– सबसे पहले किसान या पशुपालक अपने पशुओं का बीमा करवाने के लिए अपने जिले के पशु चिकित्सालय में बीमा के लिए जानकारी होती है |  

– उसके बाद पशु डॉक्टर और बीमा एजेंट किसान या पशुपालक के घर जाकर पशु के स्वास्थ्य की जांच करते हैं |

– पशु के स्वस्थ होने पर एक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र जारी किया जाता है | 

– पशु का बीमा करने के दौरान पशु के कान में माइक्रोचिप लगाई जाती है | किसान या पशु पालक की अपने पशु के साथ एक फोटो ली जाती है | 

– इसके बाद ही बीमा पॉलिसी जारी कर दिया जाता है | 

Insurance settlement criteria बीमा के निपटारे का मापदंड 

benefit of animal insurance (बीमा कंपनी) के द्वारा क्लेम को निपटाने के लिए केवल 4 दस्तावेज आवश्यक होते हैं , जैसे बीमा पॉलिसी, बीमा कंपनी के पास प्रथम सूचना रिपोर्ट,क्लेम प्रपत्र और परीक्षण रिपोर्ट |

– क्लेम बाकी रहने की स्थिति में आवश्यक दस्तावेज जमा करने के 15 दिन के भीतर बीमित राशि का भुगतान निश्चित तौर पर कर दिया जाना चाहिए | 

– क्लेम के निपटारे हेतु स्पष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाता है आवश्यक पेपर की सूची तैयार कर एक प्रति लाभार्थी को भी जाती है | 

Transfer of ownership on the subject of insurance period बीमा अवधि विषय पर  मालकीयत में हस्तांतरण 

बीमा पॉलिसी अवधि के अंतर्गत पशुओं की बिक्री यदि दूसरे व्यक्ति को करनी पड़े तो भी बीमा पॉलिसी समाप्त नहीं होती है तथा बीमा पॉलिसी की शेष अवधि का लाभ नए मालिक को स्थानांतरित कर सकता है | 

Criteria for selection of animals and beneficiaries for the scheme योजना के लिए पशु तथा लाभार्थियों के चयन हेतु मापदंड 

– देसी / दुधारू मवेशी और भैंस योजना के अंतर्गत आते हैं | इस योजना में दुधारू पशु / भैंस के अलावा वैसे गर्भवती मवेशी, दिन में कम से कम एक बार बच्चे को जन्म दिया हो, शामिल होते हैं | 

– ऐसे मवेशी या पशु जो किसी दूसरी पशु बीमा योजना अथवा योजना में पहले से शामिल कर दिए गए हैं, उन्हें इस योजना में शामिल नहीं किया जाता है | 

– सरकारी अनुदान का लाभ प्रत्येक लाभार्थी को 2 पशुओं के संख्या तक ही मिलता है एवं एक पशु का बीमा अधिकतम 3 वर्षों के लिए किया जाता है | 

– किसानों को 3 साल की पॉलिसी लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जो भी सस्ती है और बाढ़ तथा सूखा जैसे प्राकृतिक आपदाओं पर भी बीमा का लाभ पाने में उपयोगी है | अगर कोई किसान 3 साल से कम अवधि की पॉलिसी लेना चाहता है तो उसे वह भी दे दिया जाता है |

– हर राज्य में पशुओं का बीमा प्रीमियम और कवरेज राशि भी अलग-अलग होती है |